भारत का ईवीएम संकट: क्या बैलेट पेपर ही बचा पाएगा लोकतंत्र की अखंडता?

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भारत में ईवीएम धांधली के खिलाफ विपक्षी दलों की प्रेस कॉन्फ्रेंस।
14 अप्रैल, 2019 को विपक्षी नेता ईवीएम अखंडता के मुद्दों पर मीडिया को संबोधित करते हुए।

भारत का ईवीएम संकट: क्या बैलेट पेपर ही बचा पाएगा लोकतंत्र की अखंडता?

भारत का लोकतंत्र ईवीएम (EVM) के संदिग्ध उपयोग और चुनावी डेटा की अपारदर्शिता के कारण ‘चुनावी तानाशाही’ की ओर बढ़ रहा है। तकनीकी विसंगतियां और साक्ष्यों को सार्वजनिक न करने की चुनाव आयोग की जिद ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है।

RMN News Political Desk
New Delhi | May 23, 2026

प्रबंधित जनादेश: ईवीएम में हेराफेरी और संस्थानों का पतन

भारत की लोकतांत्रिक साख वर्तमान में एक गहरे संकट से गुजर रही है। विशेषज्ञों का तर्क है कि देश का “चुनावी निरंकुशता” (electoral autocracy) की ओर झुकाव तकनीकी विसंगतियों और सत्यापन योग्य डेटा ट्रेल्स के दमन के कारण हो रहा है। 2024 के चुनावों के दौरान दर्ज किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि चुनावी परिणाम अब भौतिक संभावनाओं के बजाय “निर्मित परिणामों” के दायरे में प्रवेश कर चुके हैं।

तकनीकी असंभवता और ‘मिडनाइट सर्ज’

ईवीएम की अखंडता पर सबसे बड़ा सवाल इसकी “14-सेकंड रीसेट” की सीमा से उठता है। यांत्रिक रूप से, एक ईवीएम को हर वोट के बीच कम से कम 14 सेकंड के अंतराल की आवश्यकता होती है। हालांकि, 2024 के चुनावों में कुछ बूथों पर प्रति 6 सेकंड में एक वोट दर्ज होने की बात सामने आई है, जो तकनीकी रूप से असंभव है और मतदान में धांधली की ओर इशारा करती है।

[ 🔊 भारत का ईवीएम संकट: ऑडियो विश्लेषण ]

इसके अतिरिक्त, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में “मिडनाइट सर्ज” देखा गया, जहाँ रात 8 बजे से सुबह 2 बजे के बीच लगभग 52 लाख वोट दर्ज किए गए। यह पैटर्न सामान्य मतदाता व्यवहार के विपरीत है और मतदान समाप्त होने के बाद संदिग्ध प्रविष्टियों का संकेत देता है।

संस्थागत पारदर्शिता का अभाव

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा बूथ-स्तरीय वोट गणना (फॉर्म 17C) और अंतिम परिणाम शीट (फॉर्म 20) को सार्वजनिक न करना लोकतंत्र को अंधेरे में धकेलने जैसा है। वीवीपैट (VVPAT) प्रणाली, जिसे सुरक्षा के लिए बनाया गया था, अब एक “ब्लैक बॉक्स” बन गई है, जहाँ पर्चियों की 100% मैन्युअल गिनती से इनकार किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, वी-डेम (V-Dem) इंस्टीट्यूट ने भारत को “चुनावी निरंकुशता” के रूप में वर्गीकृत किया है, जो इसे चीन और पाकिस्तान जैसी श्रेणियों में रखता है।

बैलेट पेपर की ओर वापसी: एकमात्र समाधान

एलोन मस्क जैसे वैश्विक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईवीएम को हैक करने का जोखिम बहुत अधिक है। भारत में भी, कर्नाटक जैसे राज्यों और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की टिप्पणियों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए बैलेट पेपर की ओर लौटने की आवश्यकता पर बल दिया है। चुनावी अखंडता बहाल करने के लिए तीन सुधार अनिवार्य हैं: 100% वीवीपैट सत्यापन, वास्तविक समय में मतदान प्रतिशत का खुलासा, और फॉर्म 17C एवं फॉर्म 20 का सार्वजनिक प्रकाशन।

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Rakesh Raman
Rakesh Raman

Rakesh Raman is a national award-winning journalist and founder of the humanitarian organization RMN Foundation. A former edit-page tech columnist at The Financial Express, he has served as a digital media consultant for the United Nations (UNIDO) and is a recognized expert in AI governance and digital forensics. He currently leads global investigative projects on human rights and transparency. More Info: https://rmnnews.com/about-rmn-news/

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