ईवीएम या बैलेट पेपर: भारतीय चुनाव की सच्चाई

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ईवीएम बनाम बैलेट पेपर चुनाव पारदर्शिता और मतदान अधिकार
भारतीय चुनावों में ईवीएम सुरक्षा चिंताओं के बीच कागजी मतपत्रों (Ballot Papers) से चुनाव कराने की बढ़ती मांग।

ईवीएम की निष्पक्षता पर उठते गंभीर सवाल: क्यों भारत में बैलेट पेपर से चुनाव कराना लोकतंत्र के संरक्षण के लिए अनिवार्य है?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर देश-विदेश में लगातार गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और उच्चतम न्यायालय बैलेट paper की तुलना में ईवीएम को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो मतदाताओं के अधिकारों और उनके वोट की सटीक जानकारी पाने के हक पर सीधा आघात है। चुनावी प्रक्रिया में जनविश्वास बहाल करने और भारतीय लोकतंत्र की साख बचाने के लिए सभी चुनावों में कागजी मतपत्रों (Ballot Papers) को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।

आरएमएन न्यूज़ राजनीतिक डेस्क
नई दिल्ली | 27 अक्तूबर 2026

भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण आधार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की तकनीकी सुरक्षा, डेटा में विसंगतियों और भौतिक सुरक्षा में कमियों को लेकर देश के नागरिकों, राजनीतिक विश्लेषकों, वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

इसके बावजूद, यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि भारत सरकार, निर्वाचन आयोग और उच्चतम न्यायालय इन तमाम चिंताओं को दरकिनार करते हुए कागजी मतपत्रों (Ballot Papers) के स्थान पर ईवीएम के उपयोग पर ही अड़े हुए हैं। जनता के संदेहों का निवारण किए बिना ईवीएम को जबरन थोपना नागरिकों के मौलिक अधिकार और उनके इस हक का उल्लंघन है कि उनका वोट सही उम्मीदवार को ही दर्ज हुआ है या नहीं।

ईवीएम तकनीक और घटता जनविश्वास

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपीएटी (VVPAT) जैसे घटक शामिल होते हैं। यद्यपि निर्वाचन आयोग का दावा है कि ये मशीनें पूरी तरह सुरक्षित और स्टैंडअलोन हैं, लेकिन जमीनी अध्ययन और रिपोर्टें इसके विपरीत तस्वीर पेश करती हैं। दुनिया के तकनीकी दिग्गजों और जर्मनी व नीदरलैंड जैसे उन्नत लोकतांत्रिक देशों ने ईवीएम को पारदर्शी न मानते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया है या इसे खारिज कर दिया है।

ईवीएम से जुड़े विभिन्न तकनीकी और भौतिक सवाल: ऑडियो विश्लेषण


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आरटीआई (RTI) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, निर्माताओं द्वारा निर्मित लगभग 19 लाख ईवीएम और निर्वाचन आयोग द्वारा प्राप्त की गई मशीनों की संख्या में अंतर पाया गया। इसके अलावा, मतगणना के दौरान दर्ज वोटों और अंतिम प्रकाशित आंकड़ों के बीच विसंगतियां, स्ट्रांगरूम में आग लगने की घटनाएं, और अनधिकृत वाहनों में मशीनों के परिवहन जैसी घटनाओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

संस्थागत विफलता और मतदाताओं के अधिकारों पर आघात

जब नागरिक और राजनीतिक दल शत-प्रतिशत वीवीपीएटी पर्चियों के मिलान या कागजी मतपत्रों की मांग करते हैं, तो संवैधानिक संस्थाएं इन मांगों को खारिज कर देती हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वीवीपीएटी पर्चियों के पूर्ण मिलान की याचिकाओं को अस्वीकार करना और निर्वाचन आयोग द्वारा डेटा को स्वतंत्र जांच के लिए सार्वजनिक न करना लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमजोर करता है।

वर्तमान चुनाव नियमों के तहत यदि कोई मतदाता ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराता है और परीक्षण के दौरान शिकायत साबित नहीं हो पाती, तो उस नागरिक को आपराधिक अभियोजन और जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। यह नियम आम मतदाताओं को अपनी आवाज उठाने से रोकने का काम करता है।

यदि ईवीएम व्यवस्था को इसी तरह बिना किसी खुली जांच के जारी रखा गया, तो इससे भारत में लोकतंत्र की जड़ें और अधिक कमजोर होंगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास ही चुनाव की वैधता तय करता है। इसलिए, चुनावी पारदर्शिता स्थापित करने का एकमात्र समाधान सभी राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय चुनावों में पारंपरिक कागजी मतपत्रों की वापसी है।

अधिक जानकारी के लिए, आपको EVM Research & Transparency Hub | RMN News पर जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: ईवीएम (EVM) और बैलेट पेपर में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: ईवीएम एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसमें मत डिजिटल रूप से दर्ज होते हैं और इसकी प्रक्रिया को साधारण नागरिक सीधे नहीं देख सकता। जबकि बैलेट पेपर प्रणाली में मतदाता अपना वोट कागज पर देकर सीधे पारदर्शी पेटी में डालता है, जिसकी मतगणना सभी दलों के प्रतिनिधियों के सामने प्रत्यक्ष रूप से होती है।

प्रश्न 2: विकसित देशों ने ईवीएम का उपयोग क्यों बंद कर दिया है?
उत्तर: जर्मनी और नीदरलैंड जैसे अग्रणी देशों की अदालतों और सरकारों ने माना कि चुनाव प्रक्रिया इतनी सरल और पारदर्शी होनी चाहिए कि बिना सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता वाला आम नागरिक भी मतगणना की निष्पक्षता की जांच कर सके।

प्रश्न 3: वीवीपीएटी (VVPAT) पर्चियों का पूर्ण मिलान क्यों आवश्यक माना जाता है?
उत्तर: वीवीपीएटी पर्चियों का 100% भौतिक मिलान यह सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है कि कंट्रोल यूनिट में दर्ज इलेक्ट्रॉनिक वोट मतदाता द्वारा चुने गए प्रत्याशी के ही अनुकूल हैं।

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Rakesh Raman
Rakesh Raman

Rakesh Raman is a national award-winning journalist and founder of the humanitarian organization RMN Foundation. A former edit-page tech columnist at The Financial Express, he has served as a digital media consultant for the United Nations (UNIDO) and is a recognized expert in AI governance and digital forensics. He currently leads global investigative projects on human rights and transparency. More Info: https://rmnnews.com/about-rmn-news/

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