पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन में भ्रष्टाचार का सच

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पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन में भ्रष्टाचार, पीड़ितों की लंबी कतार और सोते हुए विदेश मंत्रालय के नौकरशाह को दर्शाता हुआ एक सांकेतिक चित्र।
भारत की पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता से जूझते आम नागरिक।

क्या आपका पासपोर्ट भी पुलिस वेरिफिकेशन के कारण रुका है? जानें भ्रष्टाचार का सच और अपने कानूनी अधिकार

भारत में पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली एक अत्यंत जटिल और अनावश्यक परत बन चुकी है। नागरिकों के पास वैध पहचान और निवास प्रमाण पत्र होने के बावजूद, पुलिस अधिकारी रिश्वत के लिए झूठी रिपोर्ट लगा देते हैं। यह लेख आपके मौलिक अधिकारों, पुलिस की मनमानी और इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करने के तरीकों को उजागर करता है।

आरएमएन न्यूज़ मानवाधिकार डेस्क
नई दिल्ली | 8 सितम्बर 2026

पासपोर्ट: सरकार का अहसान नहीं, आपका मौलिक अधिकार

अक्सर लोग समझते हैं कि पासपोर्ट का मिलना सरकार की ओर से कोई विशेष रियायत या अहसान है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत पासपोर्ट प्राप्त करना आपका एक मौलिक अधिकार है। इसके साथ ही, भारत यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (UDHR) के अनुच्छेद 13 का भी हस्ताक्षरकर्ता है, जिसके तहत हर नागरिक को स्वतंत्र रूप से यात्रा करने का अधिकार प्राप्त है। कानूनी तौर पर, जब तक किसी व्यक्ति का कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड न हो, तब तक उसका पासपोर्ट नहीं रोका जा सकता।

डिजिटल इंडिया के युग में पुलिस वेरिफिकेशन की निरर्थकता

आज जब देश ‘डिजिटल इंडिया’ का दावा करता है, तब भी पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में पुलिस वेरिफिकेशन की एक अनावश्यक और दोहरी परत (redundant layer) जोड़ी गई है। जब आप पासपोर्ट सेवा केंद्र या डाकघर में पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं, तब आपके द्वारा दिए गए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और बिजली के बिल जैसे सरकारी दस्तावेज पहले से ही डिजिटल रूप से प्रमाणित और सरकारी नेटवर्क से जुड़े होते हैं। ऐसे में भौतिक रूप से पुलिस वेरिफिकेशन की कोई आवश्यकता ही नहीं रह जाती है, और यह प्रक्रिया केवल भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को बढ़ावा देने का जरिया बनकर रह गई है।

[ Also Read: Fixing India’s Corrupt Passport Verification ]

[ वीडियो: क्या आपका पासपोर्ट रोक दिया गया है? पुलिस वेरिफिकेशन के बारे में जानें। ]

रिश्वतखोरी और पुलिस की मनमानी का खेल

पासपोर्ट वेरिफिकेशन के नाम पर जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का खेल चल रहा है। घर पर आने वाले पुलिसकर्मी अक्सर नियमों से अनभिज्ञ होते हैं और आवेदकों की वास्तविक आवश्यकताओं (जैसे विदेश में शिक्षा, इलाज या पारिवारिक समारोह) की परवाह किए बिना फाइलों पर मनमानी आपत्तियां लगा देते हैं।

यदि आवेदक रिश्वत देने से इनकार करता है, तो पुलिस अधिकारी अपनी रिपोर्ट में झूठ लिख देते हैं कि “आवेदक अपने पते पर नहीं मिला” या “दस्तावेज अधूरे हैं”। हाल ही में, पुलिस ने आवेदकों से उनकी पैतृक संपत्ति और गांवों के पुराने दस्तावेज मांगने जैसी नई अवैध मांगें भी शुरू कर दी हैं, जो कि पूरी तरह से एक अपराध है।

नियमों के अनुसार, पुलिस अधिकारी को केवल तीन बुनियादी चीजों की जांच करनी होती है:

  1. आवेदक का आवासीय पता
  2. पहचान का प्रमाण
  3. ‘क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स’ (CCTNS) के माध्यम से कोई आपराधिक रिकॉर्ड

इसके अलावा पुलिस अधिकारी आपसे किसी भी अतिरिक्त दस्तावेज की मांग नहीं कर सकता है।

अक्षम नौकरशाही और पीजी पोर्टल (PG Portal) की विफलता

इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी गंभीर खामियों से जूझ रही है। भारत सरकार के लोक शिकायत पोर्टल (PG Portal या CP-GRAMS) पर की जाने वाली शिकायतें विदेश मंत्रालय (MEA) को भेजी जाती हैं। हालांकि, वहां बैठे नौकरशाह शिकायतों का निवारण करने के बजाय आवेदकों को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों (RPO) के अंतहीन चक्कर लगाने के लिए छोड़ देते हैं। इन क्षेत्रीय कार्यालयों में आवेदकों को आवारा पशुओं की तरह ठूसा जाता है और उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं होता।

डिजिटल गवर्नेंस की पोल तब और खुल जाती है जब क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) दिल्ली का आधिकारिक ईमेल आईडी पिछले कई महीनों से बाउंस हो रहा है और विभाग को इसकी सुध तक नहीं है। नौकरशाहों द्वारा पुरानी ब्रिटिश कालीन फाइलों से कॉपी-पेस्ट करके आवेदकों को निरर्थक जवाब भेज दिए जाते हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कैसे उठाएं आवाज?

वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश रमन (जो rmnnews.com न्यूज़ साइट् का संचालन करते हैं) के अनुसार, नागरिकों को पुलिस की इस मनमानी के आगे झुकना नहीं चाहिए और किसी भी परिस्थिति में रिश्वत नहीं देनी चाहिए।

यदि आपसे अवैध दस्तावेजों या रिश्वत की मांग की जाती है, तो:

  • लोक शिकायत पोर्टल (PG Portal) पर विस्तृत शिकायत दर्ज करें और उनसे कॉपी-पेस्ट वाले जवाबों को खारिज करने की मांग करें।
  • आप RMN Consumer Rights Network के ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, ताकि आपके मामले को व्यापक रूप से उजागर किया जा सके और सरकार तक आपकी आवाज पहुंचाई जा सके।

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Rakesh Raman
Rakesh Raman

Rakesh Raman is a national award-winning journalist and founder of the humanitarian organization RMN Foundation. A former edit-page tech columnist at The Financial Express, he has served as a digital media consultant for the United Nations (UNIDO) and is a recognized expert in AI governance and digital forensics. He currently leads global investigative projects on human rights and transparency. More Info: https://rmnnews.com/about-rmn-news/

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